गुरुवार, 19 जनवरी 2012

प्रेम को समर्पित.....

प्रिय! तुम मेरे जीवन का हो एक अभिन्न अंग......
तुम्हारी कल्पना रुचिकर इतनी जैसे नभ में विहंग,
प्रिय! तुम मेरे जीवन का हो एक अभिन्न अंग......
प्रकृति का है रूप नया और मन में है चंचलता,
विह्वल हूँ देख; तुम्हारी सादगी-सम सुन्दरता,
अब जाना दूर तुमसे ; मुझमें ऐसी नहीं उमंग,
प्रिय! तुम मेरे जीवन का हो एक अभिन्न अंग......
मेरे हृदय में बसे हो तुम; मेरे ख्वाबों में हो तुम,
मेरी आशाएँ हैं तुमसे ; मेरी खुशियों में हो तुम,
सुखद आनंद की अनुभूति; हर पल तुम्हारे संग,
प्रिय! तुम मेरे जीवन का हो एक अभिन्न अंग.......
अश्रु की मालाएँ हैं ; पलकों के हैं आसन,
वीरान हुए उद्यान हैं उजड़े हैं सारे चमन,
सागर में किञ्चित नहीं जितनी हृदय में है तरंग,
प्रिय! तुम मेरे जीवन का हो एक अभिन्न अंग.......
यह संसार अलौकिक है ; इसमें कोई संदेह नहीं,
तुम्हारा रूप लावण्यमय अन्य किसी का है नहीं,
तुम बिन लगे जैसे कोई भी न हो संग,
प्रिय! तुम मेरे जीवन का हो एक अभिन्न अंग.......
तुम्हारी कल्पना रुचिकर इतनी जैसे नभ में विहंग,
प्रिय! तुम मेरे जीवन का हो एक अभिन्न अंग.......

गुरुवार, 5 जनवरी 2012

दिल की बातें...

कर लो मुझसे बातें दिल की
कह दो अपनी सुन लो मेरी.....
क्या पता कल हो न पाये,
मिलने को हम तरस न जाएँ,
कहीं अधूरी न रह जाये
ख्वाहिशें अपनी कर लो पूरी,
कर लो मुझसे बातें दिल की;
कह दो अपनी सुन लो मेरी.....
आँखों को ज़ुबाँ बना
इशारों से समझा दो,
या बोल दो खुलके
बंधन सब हटा दो,
पा जाएँ खुशियाँ
या रह जाएँ गम,
कर दो फैसला कहीं
तन्हा न हो जाएँ हम,
आरज़ू दिल की तमन्ना अपनी,
कर लो मुझसे बातें दिल की;
कह दो अपनी सुन लो मेरी......

मंगलवार, 3 जनवरी 2012

आ जा रे...

सुबह सवेरा किरणें लाये,
रात चांदनी प्रीत बढ़ाये,
चूड़ी खनके तुझे बुलाये,
आ जा रे आ जा रे.......
आहट जो धड़कन की आये,
आहें जो सांसो को भायें,
पैरों की पायल गीत सुनाये,
आ जा रे आ जा रे........
सूरत भोली मूरत प्यारी,
केशु अमावस की अंधियारी,
नैन जो तेरा दरश कराये,
आ जा रे आ जा रे........
पलकों की घटा जो छाये.
अश्कों की बरसात कराये,
दिल कैसा संगीत सुनाये,
आ जा रे आ जा रे........

मगर अब तुम न होगी...

तुमसे, सुबह मेरी थी, दिन था। तुमसे, ये किरणें थीं, सूरज था।। तुमसे, एक खुशनुमा सबेरा था। तुमसे, कुछ रिश्ता मेरा गहरा था।। तुमसे, नीला...